रात के करीब साढ़े ग्यारह बजे लैपटॉप बंद करते हुए मेज़ पर पड़ा पुराना कैमरा नज़र आया।
पिछले तीन हफ़्तों से यही रूटीन है, ऑफिस का काम खत्म होते-होते नींद का समय फिर टल जाता है।

कभी फुर्सत निकालकर इसे लेकर फिर गली में निकलना है, अभी तो बस मेज़ पर रखा देखकर ही मन थोड़ा हल्का हो गया।
