चाक घूमते हुए मिट्टी को शक्ल लेते देखा, तो अपने हाथ याद आ गए, मतलब कितनी मजबूती चाहिए होती है ना इसमें।

रोटी गूंधते वक्त भी अभी यही महसूस हो रहा था, हाथ पहले जितनी ताकत नहीं देते अब।
फिर भी मिट्टी का यूं बदलना देख कर मन हल्का हो गया जरा।
चाक घूमते हुए मिट्टी को शक्ल लेते देखा, तो अपने हाथ याद आ गए, मतलब कितनी मजबूती चाहिए होती है ना इसमें।

रोटी गूंधते वक्त भी अभी यही महसूस हो रहा था, हाथ पहले जितनी ताकत नहीं देते अब।
फिर भी मिट्टी का यूं बदलना देख कर मन हल्का हो गया जरा।
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