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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[खाना] जार में रखी दाल

आज ऑफिस से लौटते हुए रास्ते में थोड़ी सब्ज़ी और राजमा ले आई।

काउंटर पर जार सजाते हुए एक पल के लिए रुक गई।

दो हफ़्ते से रात का खाना ख़ुद बना रही हूँ, बच्चों के साथ बैठकर।

आज दफ़्तर में मीटिंग तीन घंटे चली थी, फिर भी घर आकर पहले रसोई में ही गई।

पहले ज़्यादातर ऑर्डर कर लेती थी, अब हाथ से कुछ बनाना ज़्यादा सुकून देता है, शायद ये सिर्फ़ मेरे लिए ऐसा हो।

छोटा राजमा-चावल के लिए मान जाता है, बड़ी को दाल ज़्यादा पसंद है।

Cooking Ingredients

कल सुबह भिगो कर रखूँगी, वीकेंड पर धीमी आँच पर पकाऊँगी।

काम का दिन कैसा भी रहे, ये दस मिनट अपने लिए निकाल लेती हूँ।

कमेंट 3

  • हरियाली12.29

    रात को खुद बनाना शुरू करने की बात पढ़कर अच्छा लगा जी~ मीटिंग के बाद थके हुए भी किचन में जाना आसान नहीं होता। मैं भी सोचती हूं थोड़ा खुद बनाऊं पर भिगोना याद ही नहीं रहता, टाइमिंग सेट करके रखती हो क्या~

  • सुबहसैर12.30

    जार में दाल सजाते हुए रुक जाना, वो पल पढ़कर बहुत अपना सा लगा, अपने हाथ से खाना बनाना सच में अलग ही सुकून देता है, मैं भी अपनी छोटी क्यारी में सब्ज़ियाँ उगाती हूँ इसलिए जानती हूँ कि हाथ से उगाई और हाथ से बनाई चीज़ का स्वाद अलग ही होता है, बच्चों की पसंद भी घर-घर अलग होती है, मेरे यहाँ भी एक को सादा चावल-दाल से काम चल जाता है और दूसरे को सब्ज़ी ज़्यादा भाती है, भिगोई हुई दाल धीमी आँच पर पकाना

  • मुस्कान12.31

    रात को खुद बनाना, थकान नहीं होती क्या

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