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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[वस्तु] आज की काम वाली टेबल

आज सुबह उठते ही टेबल पर ये सारा सामान बिखरा पड़ा था।

कैमरा, लैपटॉप, एक पुरानी डायरी और चार्जर के तार, सब आपस में उलझे हुए।

फ्रीलांस में यही होता है, काम आता है तो एक साथ बहुत सारा आता है, नहीं आता तो टेबल हफ्तों खाली पड़ी रहती है।

Office Work

पता नहीं क्यों पर आज इस भरी हुई टेबल को देखकर अच्छा लगा, खाली टेबल से अब डर सा लगने लगा है।

लैपटॉप के बगल में वही पुरानी डायरी भी रखी है, जिसमें हिसाब लिखना फिर से शुरू किया है।

पहले महीने का खर्चा याद ही नहीं रहता था, अब लिख कर रखने की कोशिश कर रही हूँ।

देर तक बैठकर काम करने में शरीर में जान नहीं बचती, कंधे और हाथ भारी हो जाते हैं, कहाँ से शुरू करूँ समझ ही नहीं आता कभी कभी।

खैर, यही चल रहा है फिलहाल।

यहाँ भी किसी का काम ऐसे ही उतार-चढ़ाव वाला चलता है क्या।

थोड़ा लंबा लिख दिया, माफ़ करना साथियों।

कमेंट 1

  • गुलाबी08.18

    कंधे और हाथ भारी होने वाली बात एकदम सही है, देर तक बैठने से मेरी गर्दन भी अकड़ जाती है, उठकर टहलना पड़ता है

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