आज ऑफिस से थोड़ी जल्दी आ गई थी।

बच्चों ने सुबह से रोटी-सब्ज़ी की ज़िद लगा रखी थी।
शाम को रोटी, नान, दाल और दो-तीन सब्ज़ियाँ बना दीं। पूरी टेबल भर गई।
बहुत दिनों बाद हम चारों एक साथ बैठकर खाए। आमतौर पर कोई न कोई फ़ोन पर होता है या होमवर्क में उलझा रहता है, आज किसी का फ़ोन नहीं निकला। बस खाना और बातें।
छोटी ने 3 रोटियाँ खा लीं, उसके लिए ये बड़ी बात है।
पिछले 2 हफ़्ते से शादियों की वजह से घर की टाइमिंग बिगड़ी हुई थी। रोज़ बाहर का खाना या जल्दी में कुछ भी बना लेना हो रहा था।
आज पहली बार लगा कि सब ने साथ बैठकर, बिना जल्दबाज़ी के खाना खाया।
वीकेंड पर पहाड़ जाने का प्लान है, सोच रही हूँ इस बार वहाँ भी ऐसे ही टेबल लगाकर खाएँ।
आप लोग हफ़्ते में कितनी बार पूरे परिवार के साथ बैठकर खाना खा पाते हैं।
