आज काम कम था, तो दोपहर को घर में सब साथ बैठे।
तीन थालियों में रोटी, नान और पराठा एक साथ मेज़ पर आया, हफ्तों बाद ऐसा हुआ।

रोटी बेलते वक्त हाथ जल्दी थक गए, बेलन उठाना भी भारी लग रहा था आजकल।
घर में ब्रेड बनाना शुरू किया था 3 महीने पहले, सोचा था हाथ मज़बूत हो जाएंगे, पर अभी भी वैसा ही है।
खाते वक्त कोई ज़्यादा बात नहीं हुई, बस थालियां खाली हो गईं, यही काफी था।
शाम को हिसाब की डायरी खोली तो आटे का दाम भी लिख लिया, इस बार 65 रुपये किलो हो गया है।
आप सबके घर में अभी भी हाथ से रोटी बनती है, या सब कुछ मशीन ने ले लिया है?
