शनिवार शाम रसोई के काउंटर पर सारा सामान लगा दिया, राजमा भिगो दिए, जार वाले मसाले भी निकाल कर रख दिए।
बच्चों का होमवर्क खत्म हुआ तो दोनों वहीं आ गए, कुछ ना कुछ उठाते-रखते रहे।
खाना बनाने से पहले का यह टाइम सबसे अच्छा लगता है, जब कुछ बन नहीं रहा बस (सामान लगा हुआ) है।
हफ्ते भर काम और बच्चों के बीच ऐसे पल कम ही मिलते हैं, आज शादी वाली तैयारी की बात भी टल गई, बस रसोई में रुक गई।

किसी और को भी ऐसा लगता है क्या, बनाने से ज़्यादा सामान लगाना अच्छा लगे?
