आज बढ़ई को काम करते देखा, हाथ में कैलिपर लिए लकड़ी नाप रहा था।
बहुत ध्यान से नाप रहा था, जैसे एक मिलीमीटर भी इधर-उधर न हो।

मुझे अपनी बात याद आ गई, ये जो घर का हिसाब-किताब मैंने फिर से लिखना शुरू किया है, 2 हफ्ते हो गए अब तक।
पहले तो सोचा था मतलब बस लिख दूँगी, पर हर एक खर्च को ठीक-ठीक लिखना उतना आसान नहीं निकला।
फ्रीलांस का काम भी ऐसा ही है, कभी हफ्ते भर कुछ नहीं, फिर अचानक 3 दिन में सब कुछ इकट्ठा।
उस बढ़ई को देखकर लगा, पहले नाप लो, फिर काटो, जल्दबाज़ी में कुछ नहीं।
मुझे भी शरीर में ताकत बनानी है पर कहाँ से शुरू करूँ समझ नहीं आता, शायद यही वजह है, बिना नापे शुरू करने से डर लगता है।
आप लोग शुरुआत कैसे करते हैं, कोई एक छोटी चीज़ बताइए जिससे शुरू किया जा सके।
लंबा लिख दिया, माफ़ी चाहती हूँ।
