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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[आसमान] थोड़ी सी साँस

आज सुबह काम में से थोड़ा टाइम मिला तो बस यूँही निकल गई।

मैदान पर चूने की लाइनें एकदम ताज़ा खिंची हुई थीं, बादल छाए हुए थे, दूर पेड़ों के ऊपर से छतें दिख रही थीं।

A baseball field with freshly chalked foul lines on an overcast day. Rooftops are visible over the t

बस वहीं 2 मिनट खड़ी रह गई।

रोज़ सुबह 9 बजे लैपटॉप खोल लेती हूँ, पर आजकल काम कम है तो हिसाब की डायरी फिर से खोल ली है, 3 हफ़्ते हो गए लिखते हुए।

ये लाइनें देखकर लगा जैसे किसी ने नए सिरे से शुरुआत की हो, बिल्कुल वैसे ही जैसे मैं अपना हिसाब फिर से शुरू कर रही हूँ।

बाकी सब ठीक चल रहा है, बस ताकत थोड़ी कम लगती है आजकल, समझ नहीं आता कहाँ से शुरू करूँ।

आप लोग बताओ, ऐसे खाली वक़्त में क्या करते हो

कमेंट 3

  • खुशबू09.05

    वही ताकत कम लगने वाली बात से रिलेट हुई! रात को खुजली से नींद पूरी नहीं होती, पिछले 10 दिन से यही हाल है। हिसाब की डायरी वाला ख्याल अच्छा लगा, मैं भी कुछ ऐसा शुरू करूंगी।

  • खुशबू09.06

    वो लाइनों वाली बात पढ़कर अच्छा लगा, कभी-कभी ऐसे छोटे पल ही सहारा देते हैं इन दिनों

  • खुशबू09.08

    शायद ताकत डायरी लिखने में ही खर्च हो गई जी

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