आज सुबह काम में से थोड़ा टाइम मिला तो बस यूँही निकल गई।
मैदान पर चूने की लाइनें एकदम ताज़ा खिंची हुई थीं, बादल छाए हुए थे, दूर पेड़ों के ऊपर से छतें दिख रही थीं।

बस वहीं 2 मिनट खड़ी रह गई।
रोज़ सुबह 9 बजे लैपटॉप खोल लेती हूँ, पर आजकल काम कम है तो हिसाब की डायरी फिर से खोल ली है, 3 हफ़्ते हो गए लिखते हुए।
ये लाइनें देखकर लगा जैसे किसी ने नए सिरे से शुरुआत की हो, बिल्कुल वैसे ही जैसे मैं अपना हिसाब फिर से शुरू कर रही हूँ।
बाकी सब ठीक चल रहा है, बस ताकत थोड़ी कम लगती है आजकल, समझ नहीं आता कहाँ से शुरू करूँ।
आप लोग बताओ, ऐसे खाली वक़्त में क्या करते हो
