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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[वस्तु] मेज़ पर कॉफ़ी

आज लैपटॉप बंद करने का मन नहीं हुआ।

Laptop Mac

कॉफ़ी कब की ठंडी हो चुकी थी, फिर भी कप वहीं मेज़ पर पड़ा रहा।

नोटबुक और पेन बगल में यूँ ही रखे रह गए, कुछ लिखने का सोचा था पर हाथ आगे नहीं बढ़ा।

खिड़की के बाहर अंधेरा उतर आया था, अंदर बस स्क्रीन की रोशनी थी और चुप्पी।

काम अभी भी अधूरा पड़ा है, पर बीच का यह छोटा ठहराव अच्छा लगा।

सोने का समय भी धीरे-धीरे पीछे खिसकता जा रहा है, इन दिनों।

फिर भी मेज़ का यह कोना, यह कप, अपना सा लगता है।

शायद मेरे साथ ही ऐसा होता है, काम के बीच का यह छोटा पल सबसे ज़्यादा सुकून देता है।

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