आज सुबह ऑफिस के लिए निकली तो सिग्नल पर रुकना पड़ा।
सामने वाली बिल्डिंग की शीशे की दीवार पर धूप पड़ रही थी। पूरी सड़क उसी उजाले में डूबी हुई लग रही थी।
लोग जल्दी-जल्दी सड़क पार कर रहे थे। सब अपने-अपने काम की तरफ भागते हुए। साथ में कोई 15-20 लोग वहीं खड़े थे, सबके चेहरे पर वही जल्दी वाला भाव।
मैं भी वैसे ही भाग रही थी, बच्चों को छोड़कर सीधा दफ़्तर के लिए।
ये सिग्नल रोज़ पार करती हूं। कोई 10 साल से इसी रास्ते से जाती हूं।
पर आज ना जाने क्यों रुककर देखने का मन हुआ।

शायद इसलिए क्योंकि इस महीने 3 शादियां हैं। हफ़्ते के आख़िर में पहाड़ पर जाना भी तय है। तो हर छोटी चीज़ इन दिनों थोड़ी ज़्यादा दिख जाती है।
सिग्नल हरा हुआ तो फिर वही भागदौड़ शुरू हो गई। पर वो 1 मिनट अच्छा लगा।
