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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[वस्तु] मरम्मत वाली मेज़

आज सुबह गेट का लॉक ठीक करवाने गई थी।
वर्कशॉप वाले अंकल की मेज़ देखकर वहीं रुक गई।

लोहे की मेज़, ऊपर ड्रिल मशीन रखी हुई थी।
साथ में वाइस कसा हुआ, पीछे ईंट की दीवार।
हर चीज़ अपनी जगह पर, एक भी सामान इधर-उधर नहीं।

Workbench Machinery

घर में तो रोज़ कुछ न कुछ बिखरा रहता है।
दोनों बच्चों का सामान, मेरा भी।
अंकल बोले 15 साल से यही मेज़ है उनकी।

लॉक 5 मिनट में ठीक हो गया।
पर मैं 10 मिनट वहीं खड़ी बस देखती रही।

अगले महीने तीसरी शादी है दोस्त की, तैयारी बाकी है अभी।
उससे पहले घर का ये छोटा काम निपट गया, मन हल्का हो गया।

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