आज शाम सहेली के घर जाना था। (शादी की तैयारी) पर बात करनी थी।
रास्ते में यह गली आई। हल्की रौशनी में गुलाबी घर, लाल छत, बाहर बाइक खड़ी। कोई हलचल नहीं थी।
इस मौसम में हफ़्ते-दर-हफ़्ते किसी न किसी की शादी लगी है। सुबह बच्चों को स्कूल भेजना, फिर ऑफिस, फिर शाम को यह सब भागदौड़।
इस गली से गुज़रते वक़्त कुछ देर के लिए सब [धीमा] हो गया जैसे। न कोई आवाज़, न जल्दी। बस पेड़ों के पीछे से हल्की सी रोशनी।
skin ठीक होने का सफ़र शुरू ही किया है, तो शाम की ठंडी हवा में यूँ चुपचाप चलना अच्छा लगता है। खुजली भी थोड़ी कम लगती है उस वक़्त।

सहेली के घर पहुँचते ही फिर वही लिस्ट, कपड़े, तैयारी की बातें शुरू हो गईं। पर बीच का यह छोटा सा रास्ता मन में रह गया।
