आज सुबह क्लाइंट से मिलने जाना था, बहुत दिनों बाद ऑफिस वाले इलाके गई।

ग्लास वाली बिल्डिंग्स, मेट्रो स्टेशन के बाहर की भीड़, सूट पहने लोग तेज़ी से चलते हुए, ये सब देखकर अजीब सा लगा।
उफ़, 2019 से घर से ही काम कर रही हूं, तब से बस लैपटॉप और किचन टेबल यही मेरी दुनिया रह गई है।
आज सिर्फ 15 मिनट पैदल चलने में सांस फूल गई, बाकी लोग आगे निकल गए और मैं पीछे रह गई।
ताकत कितनी कम हो गई है ये तब पता चलता है जब बाहर निकलना पड़े।
मीटिंग अच्छी हुई, नया काम भी मिला, पर रास्ते भर यही सोचती रही, मतलब घर बैठे बैठे शरीर से कितना दूर हो गई हूं।
