काम से निकलते वक़्त ऊपर देखा तो यह नज़ारा दिखा। बादल घिर आए थे, हवा भी अचानक से बदल गई थी। रोज़ इन्हीं इमारतों के बीच से गुज़रना होता है पर आज नज़र ठहर गई। शाम का समय था, थकान भी साथ में थी। बच्चों को लेने जाना था फिर, रास्ते में खड़े-खड़े यह फ़ोटो खींच ली। काम, घर, फिर शादियों की तैयारी – इस बीच ऐसा एक पल मिल जाए तो अच्छा लगता है। अगली शादी की तैयारी भी सिर पर है, सोचकर ही थकान हो रही है।

फिर भी यह आसमान देखकर (थोड़ा सुकून) मिला, बस इतना कहना था।
