काम में सिर घुसाए बैठी थी, अचानक बालकनी पर आ गई।

सामने पूरी घाटी दिखी, झील दिखी, पहाड़ दिखे, और वो लाल झंडा हवा में लहरा रहा था!
बस वहीं थोड़ी देर खड़ी रह गई, कुछ बोलने का मन ही नहीं हुआ।
ऐसे पल कम ही मिलते हैं, इतने काम के बीच।
काम में सिर घुसाए बैठी थी, अचानक बालकनी पर आ गई।

सामने पूरी घाटी दिखी, झील दिखी, पहाड़ दिखे, और वो लाल झंडा हवा में लहरा रहा था!
बस वहीं थोड़ी देर खड़ी रह गई, कुछ बोलने का मन ही नहीं हुआ।
ऐसे पल कम ही मिलते हैं, इतने काम के बीच।
झंडा भी वाह बोल रहा था लगता है
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