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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[वस्तु] रात की किताब

आजकल रात को किताब लेकर बैठती हूं तो समय का पता ही नहीं चलता।

आज भी यही हुआ, सोचा था आधा घंटा पढ़कर सो जाऊंगी, पर घड़ी देखी तो 1 बजे थे हाहा!

Book Reading

लैंप की हल्की रोशनी में बस मेज़ और किताब, बाकी सब जैसे रुक सा जाता है।

बच्चों के सोने के बाद का यही थोड़ा सा समय अभी अपने लिए बचा है।

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