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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[आसमान] काम रोककर ऊपर

काम बीच में छोड़कर छत पर आ गई।

आजकल फ्रीलांस के काम में यही दिक्कत है, कभी दिनभर कुछ नहीं तो कभी तीन प्रोजेक्ट एक साथ।

Picture taken from the top floor balcony. Greenish plants, building etc.

आज सुबह से लैपटॉप पर बैठी थी, 3 घंटे से डेडलाइन देखते-देखते लगा बस अब नहीं हो रहा।

ऊपर आई तो बादल हल्के-हल्के थे, सामने वाली बिल्डिंग की छत पर पेड़ हरे-भरे लग रहे थे। रोज़ यही नज़ारा है, आज पहली बार ध्यान से देखा।

इस उम्र में वैसे भी ताकत कम लगती है, सीढ़ी चढ़ते हुए भी सांस फूल जाती है। पर 5 मिनट यहां खड़े रहकर लगा, शरीर की नहीं तो कम से कम सिर की थकान थोड़ी उतर गई।

नीचे जाकर फिर से काम पर बैठना है, यानी ब्रेक ज़्यादा देर का नहीं था। पर इतना काफी था।

थोड़ी लंबी हो गई बात, माफ़ करना।

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