आज फ़ोन साफ़ कर रही थी तो पुरानी फ़ोटो में ये मिल गई। पिछले साल दिसंबर की बात है, रसोई पूरी सजी हुई थी, कोने में छोटा क्रिसमस ट्री भी रखा था। मेरी मम्मी और 8 साल, 5 साल की दोनों बच्चियां साथ में कुकीज़ बना रही थीं।

मम्मी बता रही थीं कैसे आटे को शेप देना है, बच्चियां हाथ में आटा लिए बैठी थीं। मैं बस साइड से (बिना कुछ बोले) फ़ोटो खींच रही थी।
रात के करीब 9 बजे तक रसोई में यही हल्ला था। कुछ कुकीज़ तो जल भी गई थीं, पर किसी को फ़र्क नहीं पड़ा।
अभी ये फ़ोटो देखकर सोच रही थी, ऐसी शामें कब आख़िरी बार आई थीं। इस साल 2-3 weekend तो सिर्फ़ शादियों में ही निकल गए, हफ़्ते वाला ट्रेक भी लगातार छूटता जा रहा है।
पता नहीं फिर कब मम्मी और बच्चियां साथ में कुछ बनाएंगी। पर ये फ़ोटो देखकर उस शाम का पूरा हल्ला-गुल्ला अभी भी वैसा ही याद आ गया।
