बेटे के कमरे में आज सुबह वाई-फाई ठीक करने गई थी तो देखा मेज़ पर लैपटॉप, कैमरा, लेंस, कीबोर्ड सब बिखरे पड़े थे, वो कैमरा भी उसने बाज़ार से पुराना ही लिया था फिर भी नया जैसा चमकता रहता है, और उसी के बीच मेरी वो पुरानी कॉपी भी दबी हुई थी जिसमें मैंने पिछले 3 हफ्ते से नौकरी वाले फॉर्म के नोट्स लिख रखे हैं,
कीबोर्ड पर उंगली रखते ही अजीब सा लगा, इतने सालों बाद फिर से टाइप करना सिख रही हूं, गलत बटन दबती है तो पूरी लाइन ही उलट जाती है, कभी कभी तो एक शब्द लिखने में ही इतनी देर लग जाती है कि मन करता है कॉपी बंद कर दूं,

बेटा बोलता है मम्मी आप बस प्रैक्टिस करते रहिए बाकी सब मैं देख लूंगा, पर मन में कहीं न कहीं लगता है इस उम्र में यह सब नया सीखना थोड़ा अटपटा है, उसकी मेज़ का सामान इतना करीने से रखा रहता है और मेरी कॉपी वहीं एक कोने में पड़ी रहती है,
फिर भी उसे वहीं मेज़ पर रहने दिया, कल सुबह फिर बैठूंगी।
