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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[आसमान] झंडे के उस पार

आज सुबह 6 बजे नींद अचानक खुल गई, आदत से बाहर, हर दिन तो घर के काम में उलझी रहती हूं, नाती की देखभाल में और रसोई में, पर आज पति के साथ यहां आना हुआ तो बालकनी पर खड़ी हो गई, लकड़ी की रेलिंग पर हाथ रखा तो सामने पूरी वादी फैली हुई थी, झील, शहर, पहाड़ सब एक साथ, और बीच में वो लाल झंडा हवा में हिल रहा था।

From a wooden balcony with a red flag, a panoramic view spans Pokhara’s valley, Lake Phewa, the city

मतलब क्या कहूं, इतना बड़ा नज़ारा देखकर पहले तो कुछ समझ ही नहीं आया, बस खड़ी रह गई, हाथ में चाय का कप ठंडा होता रहा और मैं वहीं रेलिंग पकड़े देखती रही।

रोज़ की भागदौड़ में, नौकरी की तलाश और घर के हिसाब-किताब में, ऐसी सुबह याद ही नहीं रहती कि आसमान भी इतना खुला हो सकता है, आप सबको भी बस यही दिखाना था, बहुत बहुत सुकून वाला पल था वो।

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