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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[आसमान] काम से थोड़ा ब्रेक

काम में सिर उठाने की फुर्सत ही नहीं मिली आज सुबह से।

क्लाइंट की डेडलाइन थी, वो पूरी हुई तो लैपटॉप बंद करके बालकनी में आ गई थी।

Vibrant greenery and a mountain range beneath clear skies, View from a balcony with colourful flower

सामने पहाड़ दिख रहे थे, आसमान बिल्कुल साफ था, बादल भी हल्के-हल्के तैर रहे थे।

रेलिंग पर जो गमले रखे हैं ना, उनके फूल भी आज कुछ ज़्यादा ही खिले हुए लग रहे थे मुझे।

बस वहीं खड़ी होकर थोड़ी देर देखती रही, कुछ सोचा भी नहीं, बस देखा।

फ्रीलांस काम में यही दिक्कत है, कभी इतना काम आता है कि सांस लेने का टाइम नहीं मिलता, कभी हफ्तों कुछ नहीं होता।

आज वाला दिन उस पहली वाली किस्म का था, सुबह से लैपटॉप के सामने से हिली भी नहीं थी।

बीच-बीच में यही सोच रही थी कि इतना काम आ रहा है तो हिसाब-किताब भी ठीक से लिखूं, इस महीने से डायरी फिर से शुरू की है।

काम ज़्यादा हो तो पैसा भी आता है, पर हिसाब रखने का मन ही नहीं करता उस वक़्त, आज बालकनी में खड़े होकर वही याद आया।

सुबह ब्रेड भी बनाई थी, वो खुशबू अभी तक रसोई में है, और उसी बीच यह नज़ारा मिल गया।

बस इतना ही, आज का यही एक पल था जो अपने पास रखना चाहती थी।

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