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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[वस्तु] मेज़ पर कलम और खाता

आज मेज़ पर डायरी, कलम और फ़ोन साथ पड़े देखे।

बजट वाली डायरी फिर से खोली है, बहुत दिन से बंद पड़ी थी।

फ्रीलांस काम में मतलब कभी इतना काम आता है कि सिर उठाने का टाइम नहीं मिलता, कभी हफ़्तों कुछ नहीं आता। तब पैसा कहाँ जा रहा है ये लिखना छूट गया था।

Office Work

अभी थोड़ा खाली टाइम मिला तो सोचा फिर से शुरू करूं।

घर में अब ब्रेड बनाना भी शुरू किया है, आटा-मक्खन का खर्चा भी उसी डायरी में जुड़ने लगा है।

ताकत कम रहती है तो बाहर बहुत भाग-दौड़ नहीं होती, ऐसे में मेज़ पर बैठकर छोटी-छोटी चीज़ें लिख लेना ही ठीक लगता है।

काम कम हो या ज़्यादा, हिसाब लिखना बंद नहीं करना है, यही सोच रही हूं आजकल।

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