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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[रास्ता] सुबह की रफ़्तार

सुबह-सुबह दूध लेने निकली थी, रास्ते में साइकिल वालों का पूरा ग्रुप मिल गया, ऑफिस की तरफ जाते हुए।

एक ही रफ़्तार में, एक साथ, कितना आसान लग रहा था उनका चलना!

मुझे तो फ्रीलांस में कोई फिक्स रूटीन है ही नहीं जी, कभी काम इतना आ जाता है कि सांस लेने की फुरसत नहीं, कभी हफ़्तों कुछ नहीं होता।

Cycling City

उनको देखकर लगा, मतलब, शरीर में भी कोई ऐसी लय होनी चाहिए थी मेरी भी, बस शुरुआत कहां से करूं यही समझ नहीं आता अभी तक।

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