आज रात करीब 10 बजे तक लैपटॉप पर बैठी रही।

महीने की क्लोजिंग रिपोर्ट थी, आंकड़े मिलाने में टाइम लग गया।
बगल में डायरी, पेन और पुरानी नोटबुक भी पड़ी थी, वैसे ही एक फोटो खींच ली।
अकाउंट्स का काम है तो हर महीने यही सिलसिला चलता है।
घर से ही काम करती हूं, तो पूरे दिन इसी टेबल पर बैठे रहना होता है।
कभी लगता है कागज और स्क्रीन दोनों कभी खत्म नहीं होते।
फिर भी आखिर में (हिसाब बराबर) हो जाए तो थोड़ा सुकून मिलता है।
