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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[खाना] अकेले की रसोई

पास्ता के लिए सारा सामान काटते-काटते अचानक ध्यान गया कि रसोई में बस मैं और वो टमाटर वाली खुशबू है, बाकी पूरा घर एकदम सन्नाटे में डूबा है।

बहू बच्चों को लेकर पार्क गई है, वो लोग लौटेंगे तो पूछेंगे आज खाने में क्या बना है, तो मैंने सोचा चलो आज दाल-चावल की जगह कुछ नया ट्राई करते हैं, और लहसुन भूनते-भूनते ये सारा सामान टेबल पर यूं ही सजा लिया।

रोज़ का काम तो वही रहता है, बर्तन-कपड़े और घर की साफ-सफाई, पर ये थोड़ी सी देर, मतलब जब कोई मांगने वाला नहीं होता, बस पतिले में कुछ पकने की आवाज़ आती रहती है, वो अपने आप में एक अलग तरह का सुकून दे जाती है।

Cooking Food

नौकरी वाले फॉर्म भी भरने थे आज, वो अभी तक वैसे ही पड़े हैं, पर रसोई में खड़े-खड़े लगा कि चलो थोड़ी देर के लिए वो सब भी टल जाए तो कोई बात नहीं।

बच्चे लौटेंगे तो शायद नाक-भौं सिकोड़ेंगे कि ये कैसा खाना बना दिया, फिर भी बना तो रही हूं, थोड़ा अपने मन के लिए भी और थोड़ा उनके लिए भी।

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