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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[वस्तु] शादियों का हिसाब

आज सुबह मेज़ पर यही पड़ा था। पुरानी नोटबुक और पेन।

बहुत दिन से इसे यूं ही खुला छोड़ रखा था। आज खोलकर देखा तो अंदर आधा पन्ना खाली था।

इस महीने दोस्तों की (3 शादियां) हैं एक के बाद एक। किसको क्या देना है, कब जाना है, सब भूल जाती हूं इन दिनों।

तो सोचा फिर से लिखना शुरू करूं। ऑफिस के काम के साथ ये भी अब [इसी डायरी] में।

Office Work

काम की बातें अलग, घर का हिसाब अलग रखा करती थी अब तक।

मेज़ भी आज साफ लग रही थी। हल्के भूरे रंग की, बिना किसी झंझट के।

बस यही देखकर रुक गई थोड़ी देर के लिए।

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