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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[रास्ता] रास्ते में एक झलक

आज सुबह नौकरी वाले काम से थोड़ा बाहर निकलना पड़ा, बस कागज़ जमा करने ही जाना था, पर सड़क पर एक लड़की साइकिल पर इतनी तेज़ी से निकली कि मैं वहीं रुक कर देखती रह गई।

बाल उड़ रहे थे, कंधे पर बैग लटका हुआ था, शायद वो भी दफ़्तर के लिए ही निकली होगी, पर उसके चेहरे पर कोई जल्दबाज़ी नहीं दिखी, बस एक तरह की सहजता थी, जो मुझे अपने अंदर से बहुत दिनों से नहीं दिखी थी।

घर से निकलते वक़्त घड़ी में 9 बज चुके थे, और मेरे कदम भारी-भारी से पड़ रहे थे, बेटे की, पोते की, घर की सौ बातें साथ लिए चल रही थी, फिर भी उस लड़की को देखकर एक पल के लिए सब रुक सा गया।

Woman Bicycle

बहुत साल पहले मैं भी शायद ऐसे ही किसी रास्ते पर बेफ़िक्र चली होऊंगी, अब ठीक से याद भी नहीं आता, बस इतना लगा कि कागज़ जमा करने से पहले वो एक झलक पूरे दिन के साथ रह गई।

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