आजकल हाथों को कुछ न कुछ करते रहना अच्छा लगता है।
रिटायरमेंट के बाद समय ही समय है जी।
आज यूं ही बैठे बैठे सूखे पत्ते और चीड़ के फल इकट्ठा किए और यह सजावट बना डाली।

एक सहेली की शादी है अगले महीने, सोचा उसके लिए अपने हाथ से कुछ बना दूं।
बचपन में मम्मी घर में ऐसी चीज़ें बनाया करती थीं, वो याद आ गई अचानक से।
बनाना मुश्किल नहीं था, बस थोड़ा समय लगा और मन पूरे टाइम उसी में लगा रहा।
अब सामने रखकर देख रही हूं तो असली फूलों से भी ज़्यादा अच्छा लग रहा है यह।
