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जीवन का समय आज की एक तस्वीर

[वस्तु] मेज़ पर आज की किताब

दुकान बंद करके आई तो लैंप जलाकर बैठ गई।

मेज़ पर पड़ी पुरानी किताब बहुत दिन बाद उठाई। खाता फिर से लिखना शुरू किया है तो सोचा जरा पढ़कर तरीका ठीक से समझ लूं।

लैंप की हल्की रोशनी में पन्ने पलटते हुए वक़्त का पता ही नहीं चला। दिनभर बैठे रहने से कमर अकड़ी हुई थी, किताब खोलते ही वो भी भूल गई।

Book Reading

रात का यही थोड़ा-सा समय अपने लिए लगता है।

टिप्पणियाँ 2

  • खुशबू09.16

    रात का ये थोड़ा सा समय पढ़ने में लगे तो दिनभर की अकड़ी हुई कमर भी भूल जाना पढ़कर बड़ा अच्छा लगा जी। ये खाता कब से फिर से लिखना शुरू किया है, दुकान का पुराना हिसाब-किताब है क्या जी

  • → खुशबू버티는중09.16

    हाँ जी दुकान का ही पुराना हिसाब है, अभी शुरू किया

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