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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[वस्तु] लैंप की रोशनी में

आज सुबह से थकान जैसा लग रहा था, कुछ करने का मन नहीं हो रहा था.

तो मेज़ पर किताब रखकर बैठ गई, लैंप जला दिया.

फ्रीलांस में यही है, कभी हाथ खाली नहीं होते, कभी ऐसे दिन आ जाते हैं जब बस बैठे रहना है.

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आज बस यही रोशनी और किताब, इतना ही काफी लगा!

पन्ने पलटते-पलटते घड़ी देखी तो 9 बज गए थे, पता ही नहीं चला शाम कब हो गई.

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