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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[खाना] रात का पास्ता

आज ऑफिस से लौटते ही सीधा किचन में घुस गई।
बच्चों को भूख लगी थी, जल्दी में पास्ता बना दिया।

Cooking Food

टेबल पर सामान यूं ही फैला रह गया, प्याज़-टमाटर, चीज़ का डिब्बा, वही रोज़ वाला बर्तन।
बनाते-बनाते ध्यान ही नहीं रहा कि बाहर कितना अंधेरा हो गया था!

खाने बैठे तो थोड़ी देर के लिए सब चुप, बस खाना और हल्की हंसी की आवाज़ें।
काम का दिन भारी था, फिर भी बस यही (थोड़ा सुकून) काफी लग रहा था।

शादियों का सीज़न सिर पर है, अगले हफ्ते फिर तैयारी शुरू होगी।
पहाड़ों पर जाने का मन भी बार-बार आ रहा है, पर फिलहाल इतनी सी शाम ठीक है।
रसोई की यही थकान भी अपनी जगह अच्छी लगी।

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