आज रात डेस्क पर लैपटॉप के साथ हिसाब की पुरानी कॉपी भी खुली पड़ी थी, बगल में आधा भरा पानी का गिलास रखा था।
फ्रीलांस का काम कभी बिलकुल नहीं आता, कभी एक ही दिन में सब जमा हो जाता है, ये हफ्ता वैसा ही निकल रहा है।

2 महीने बाद आज फिर से खर्चे लिखने बैठी, कीबोर्ड ठंडा पड़ा रहा, कॉपी में पेन की स्याही अभी सूखी नहीं थी।
