आज इंटरव्यू के लिए निकली तो पूरा रास्ता पत्तों से भरा हुआ था। हल्की धूप थी, पत्ते नारंगी हो चुके थे, बीच-बीच में ठंडी हवा भी चल रही थी। सोचा था टहलते हुए मन हल्का हो जाएगा, पर 20 मिनट चलने में ही सांस फूलने लगी, बॉडी इतनी वीक हो गई है कि खुद ही हैरान हो गई~ रास्ते किनारे थोड़ी देर रुक गई, पत्तियां देखती रही, लाइट इतनी अच्छी थी कि स्केच बनाने का मन हुआ पर पेंसिल साथ नहीं थी। घर आकर वही फोटो देख के ड्रॉइंग बना ली, काफी टाइम लगा पर बन गई। इस साल सोचा था किताबें भी पढ़ूंगी, अभी तक सिर्फ एक ही पढ़ पाई हूं, पर चलता है। इंटरव्यू कैसा जाएगा पता नहीं, पर रास्ते का ये पल अच्छा था, बस इतना कह सकती हूं।

