आज सुबह ऑफिस के लिए निकलते वक्त ऊपर देखा.
बादल इतने साफ़ और गोल-गोल जमे हुए थे, रुक कर देखना पड़ा.

बच्चों को स्कूल छोड़कर लौट रही थी, 9 बजे के आसपास.
रास्ते में छत के ऊपर यही आसमान दिखा.
काम, घर, फिर काम – इसी में दिन निकल जाता है.
बस 2 मिनट के लिए वहीं रुक गई, कुछ सोचे बिना.
फोन उठाकर एक फोटो खींच ली.
बाकी दिन फिर वही भागदौड़ है.
