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जीवन का समय आज की एक तस्वीर

[रास्ता] भीड़ में सुबह

आज दुकान का शटर खोलते हुए सामने वाले चौराहे पर देखा, ऑफिस जाने वालों की लाइन एक साथ सड़क पार कर रही थी।

घड़ी में सिर्फ़ 8 बज रहे थे, फिर भी सब जल्दी में थे। कोई फ़ोन देखते हुए चल रहा था, कोई बैग कंधे पर टांगे लगभग दौड़ ही रहा था, कोई अभी भी नींद से पूरा जागा नहीं लग रहा था।

मैं वहीं दरवाज़े के पास खड़ी रह गई, हाथ में झाड़ू लिए, बस देखती रही।

पहले मैं भी ऐसे ही निकलती थी रोज़, ठीक इसी टाइम पर, दफ़्तर के लिए। अब दुकान में बैठे-बैठे ही पूरा दिन कट जाता है, कहीं जाना ही नहीं पड़ता। कमर तो अब पहले जैसी नहीं रही, दिन भर बैठे रहने से अकड़ ही जाती है।

पर वो भीड़ देखकर पुराना समय याद आ गया, वो जल्दी-जल्दी चलना, बस के लिए दौड़ना, महीने के आख़िर में हिसाब जोड़ना, सब कुछ…

People Walking

बस इतना ही, आज सुबह की एक झलक।

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