आज सुबह से काम में उलझी रही, बीच में समय ही नहीं मिला।
दोपहर में थोड़ी फुर्सत निकली तो घर में 3 थालियाँ लग गईं, साथ रोटी-नान-सब्ज़ी।

काम के बीच ऐसे पल कम मिलते हैं, पर मिल जाएं तो अच्छा लगता है।
फ्रीलांसिंग में कभी काम इतना कि सांस लेने का वक्त नहीं, कभी इतना खाली कि कुछ समझ नहीं आता। आज वाला दिन दूसरी तरफ का था।
