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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[रास्ता] सुबह की छोटी सैर

दुकान खोलने से पहले थोड़ी देर के लिए निकल जाती हूँ।

आज सुबह वाला रास्ता एकदम खाली था। सिर्फ पेड़ और सन्नाटा, कोई आवाज़ नहीं। बस अपने कदमों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

बैठे-बैठे कमर अकड़ जाती है, इसलिए ये अब रोज़ का रूटीन बन गया है। दुकान 9 बजे खुलती है, उससे पहले का ये वक़्त सिर्फ अपना होता है।

Nature Path

कल रात रोटी का आटा गूंथकर रखा था, वापस जाकर सेंकना है। हिसाब-किताब की कॉपी भी साथ ले जानी है, अभी भी लिखना बाकी है।

पेड़ों के बीच से चलते हुए दिमाग थोड़ा हल्का हो जाता है।

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