दुकान के पीछे वाले दरवाज़े से निकला था, कुछ सामान बाहर रखने के लिए।
ऊपर देखा तो बादल पेड़ों और छत के ऊपर ऐसे फैले हुए थे कि 2 मिनट वहीं खड़ा रह गया।

सुबह से काउंटर पर बैठे-बैठे कमर अकड़ गई थी, यही एक ब्रेक था आज का।
अकेले दुकान संभालने में ये छोटे पल ही बचा लेते हैं।
फोन उठाकर एक फोटो खींच ली, बस इतना ही।
