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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[वस्तु] फिर से वही कॉपी

लैपटॉप के बगल में कॉपी और पेन पड़े थे, दुकान बंद करने से पहले वैसे ही फोटो खींच ली।

यह वही पुरानी कॉपी है जो साल भर से दराज में पड़ी थी। पिछले हफ्ते से फिर से हिसाब लिखना शुरू किया है, हर दिन शाम को दुकान बंद करने के बाद बैठकर लिखता हूं।

Notepad Notebook

पहले मोबाइल ऐप पर लिखता था, पर कॉपी में लिखने का मज़ा अलग है, हाथ से लिखने में समय भी ज़्यादा लगता है पर मन शांत रहता है।

आजकल दुकान अकेले संभालता हूं तो घंटों कुर्सी पर बैठे रहने से कमर अकड़ जाती है, कॉपी में झुककर लिखने से वो और बढ़ जाती है, पर आदत नहीं छूटती।

इस महीने अब तक 18 दिन लगातार लिखा है, बीच में एक भी दिन नहीं छोड़ा।

लैपटॉप वहीं खुला पड़ा रहता है, पर कॉपी उठाकर हाथ से लिखने में जो सुकून है वो स्क्रीन में नहीं मिलता।

कमेंट 1

  • सुकून10.01

    मुझे भी झुककर लिखने से कमर अकड़ जाती है

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