रात के 9 बजे तक काम ही चलता रहा।

बाद में आटा गूंधकर घर पर ही पिज़्ज़ा बना लिया।
बहुत दिनों बाद थोड़ी वाइन भी डाल ली।
मेज़ पर बस यही था आज रात, और कुछ नहीं।
हफ़्ता पूरा भारी गया था, ये थोड़ा टिकने जैसा लगा।
रात के 9 बजे तक काम ही चलता रहा।

बाद में आटा गूंधकर घर पर ही पिज़्ज़ा बना लिया।
बहुत दिनों बाद थोड़ी वाइन भी डाल ली।
मेज़ पर बस यही था आज रात, और कुछ नहीं।
हफ़्ता पूरा भारी गया था, ये थोड़ा टिकने जैसा लगा।
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