शाम 7 बजे दुकान बंद करने से पहले बालकनी पर आया। सामने की दुकानों की छतें अभी रोशन हैं, पीछे घरों की बत्तियां जलने लगी हैं।
आसमान हल्के नारंगी से धीरे गहरा होता जा रहा था। पूरे दिन हिसाब और आटे के बीच बस यही थोड़ी देर अपने लिए थी। कल से कॉपी फिर खुली रखूंगा, पर अभी बस यही वक़्त था।
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उत्तर देंलेखकसदस्यअभी कोई टिप्पणी नहीं।लिंक कॉपी हो गयाकॉपी नहीं हो सकालॉग इन करना ज़रूरी हैपसंद कियापसंद हटाईसेव कियासेव से हटायाकृपया थोड़ी देर बाद फिर कोशिश करेंकृपया कुछ लिखेंटिप्पणी पोस्ट कीटिप्पणी पोस्ट नहीं हो सकी{who} को जवाब दें