आज रात के खाने के लिए कुछ खास सोचा नहीं था, बस सुबह रोटी के लिए गूंधा हुआ थोड़ा आटा फ्रिज में बचा पड़ा था।
सोचा आज रोटी की जगह उसी आटे से पिज़्ज़ा बना लूं, ऊपर जो सब्ज़ियाँ और चीज़ पड़ी थी वही डाल दी।
ओवन में करीब 12 मिनट सेंकते हुए बस टेबल पर बैठी रही, साथ में वाइन का एक गिलास भी निकाल लिया।
बाहर से इतना टॉपिंग वाला पिज़्ज़ा मंगाते तो 500 रुपये से कम में नहीं पड़ता, घर पर बनाने में वो पैसे भी बच गए।
हिसाब की कॉपी में ये बचत वाली बात भी लिख दी, शायद इसी तरह महीने के आखिर में कुछ जमा बचेगा।
काम कम चल रहे दिनों में ऐसी छोटी-छोटी चीज़ें ही दिन को भर देती हैं, मतलब सुबह से लगता है दिन खाली निकलेगा पर शाम तक कुछ न कुछ बना ही लेती हूं।
आटा गूंधते-गूंधते, चीज़ कद्दूकस करते हुए हाथ भी थोड़ा हिल जाते हैं, वरना दिनभर बैठे रहने से हाथ और भी अकड़ जाते हैं।
वाइन वैसे रोज़ नहीं लेती, आज का दिन बस ऐसा ही लगा इसलिए निकाल ली।

जी, थोड़ा लंबा हो गया, माफ़ करें सबको।
