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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[बनाया] सूखे पत्तों का गुच्छा

आज सुबह रोटी के लिए आटा लेने निकली थी।

रास्ते में कुछ सूखे पत्ते और छोटे पाइनकोन पड़े मिले, उठा लाई।

घर आकर धागे से बाँध दिया, साथ में एक छोटी चिट्ठी भी रख दी।

पड़ोस वाली दीदी को रोटी के डिब्बे के साथ भेजने का सोचा है।

हाथ में ताकत कम है तो धागा बाँधने में भी वक़्त लगा, कोई 10 मिनट।

हाथ अब भी थोड़ा जकड़ा हुआ है, पर चिट्ठी पर लिखते वक़्त ध्यान नहीं गया।

Leaves Rustic

पैसे खर्च किए बिना भी कुछ बना देने जैसा लगा।

कमेंट 4

  • दिल से10.16

    रोटी के साथ ऐसा छोटा तोहफा सच में अच्छा लगता है, हाथ जकड़ा होने पर भी बाँधना आसान नहीं होता जी

  • गुलाबीधूप10.16

    हाथ जकड़ा हुआ था फिर भी धागा बाँधने में मन लगा दिया यह बात अच्छी लगी जी, ये जकड़न कितने दिन से चल रही है जी

  • दिल से10.16

    पत्तों और पाइनकोन से बाँधा हुआ वो गुच्छा सुनने में ही प्यारा लग रहा है जी, पड़ोस वाली दीदी तो सोचेंगी किसी दुकान से मंगवाया है, पैसे तो खर्च ही नहीं हुए इसमें! मेरे यहाँ भी दुकान में किसी को छोटा सा कुछ पैक करके देना होता है तो धागा बाँधने में हाथ कांपने लगता है, पिछली बार भी छोटा सा काम बहुत देर तक खींचा था, गाँठ बार बार खुल जाती थी। आखिर में धागे को मोड़कर कस के बाँधा तो टिक गया, तब से यही

  • दिल से10.16

    मन लगे तो हाथ का दर्द भी भूल जाता है जी

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