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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[रास्ता] आटे की मिल तक

आज सुबह दुकान एक घंटे के लिए बंद करके स्टेशन गई, शहर वाली मिल से आटा लेने के लिए उस तरफ ट्रेन से जाना पड़ता है, गाड़ी वाले से मंगवाने में हर बार भाव ज़्यादा लगता है।

प्लेटफ़ॉर्म पर खड़े-खड़े सामने की पटरियां देख रही थी, ऊपर वो नया फ़ुट ओवरब्रिज बना है न, उसी से लोग इस तरफ से उस तरफ जा रहे थे, लोहे का ढांचा देखकर लगा कितना मज़बूत बना है।

The image shows a railway station platform with multiple train tracks in the foreground. A modern pe

ट्रेन आने तक खड़े रहना भी ठीक लगा, रात को हिसाब लिखते हुए झुककर बैठने के बाद सीधे खड़े होकर बस पटरी देखना अच्छा लगा।

25 किलो आटा लेकर लौटी, हाथ थोड़े भारी हो गए लेकिन मन हल्का था, कभी-कभी दुकान से बाहर निकलना भी ज़रूरी लगता है जी।

कमेंट 1

  • कच्ची कैरी11.03 21:41

    दिनभर खड़े रहने से पैर भारी होना मुझे भी पता है जी

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