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जीवन का समय ›आज की एक तस्वीर

[आसमान] छत के ऊपर सफ़ेद बादल

आज काउंटर से उठकर पीछे वाले दरवाज़े तक गई, कल से जो नया नियम बनाया है उसी के हिसाब से, बस कमर सीधी करने के लिए एक पल रुकना था।

दरवाज़ा खोला तो सामने पेड़ों के ऊपर आसमान बिल्कुल साफ़ था, उसी पेड़ों के पीछे छत का कोना भी दिख रहा था, और बादल ऐसे जमा थे जैसे रुई का गुच्छा कोई धीरे-धीरे फैला रहा हो।

A clear sky adorned with fluffy white clouds over trees and a rooftop.

दोपहर का वक़्त था, गली में कोई आता-जाता नहीं दिख रहा था, दुकान का शटर भी आधा गिरा हुआ ही छोड़ा था, बस इतना कि कोई आए तो आवाज़ सुनाई दे।

थोड़ी देर वहीं खड़ी रही, हाथ कमर पर रखे हुए, कुछ खास सोचा नहीं, बस देखती रही। मन में वही आटा गूंधने वाला टाइमर और खुली पड़ी हिसाब की किताब दोनों एक साथ याद आए, मगर उस एक पल में दोनों पीछे छूट गए, सिर्फ़ ऊपर वाला आसमान ही सामने था।

फिर पीछे मुड़ी और अंदर आकर फिर से हिसाब में लग गई, पर वो थोड़ी देर वाला ठहराव अभी तक मन के किसी कोने में बना हुआ है।

कमेंट 1

  • खुशबू11.03 22:17

    ये नियम कब से बनाया जी, पहले से रुकती थी क्या 🙏

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