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मन का समय ›कृतज्ञता डायरी

सीढ़ी चढ़ने में मदद मिली

आज सामान लेकर सीढ़ियां चढ़नी थीं, हाथ में ताकत नहीं थी।

पड़ोस के भैया ने बिना कुछ कहे झोला पकड़ लिया।

छोटी सी बात थी, पर दिन भर याद रही।

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