बड़ी बात होने की ज़रूरत नहीं। बस आज की एक बात काफी है। बस सही समय पर आ गई, किसी ने दरवाज़ा पकड़ रखा — इतना ही काफी है। ज़बरदस्ती ढूँढने की ज़रूरत नहीं। जिस दिन कुछ न मिले, उस दिन न लिखें।
बस कुछ दिन लिखकर देखिए, धीरे-धीरे उन दिनों में भी कुछ न कुछ दिखने लगेगा जब पहले कुछ नहीं दिखता था। किसी और की पोस्ट पर कमेंट करना ज़रूरी नहीं। बस पढ़कर चले जाना भी काफी है।
