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मन का समय ›कृतज्ञता डायरी

आटा गूंधना आज भारी लगा

आज आटा गूंधते वक्त हाथ जल्दी थक गया।
पहले वाली ताकत अब नहीं बची।
फिर भी रोटी बन गई, बस यही।

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