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मन का समय ›कृतज्ञता डायरी

हाथों में आज ज़ोर नहीं था

हाथों में आजकल ज़ोर नहीं रहता, आटा गूंधते वक़्त भी 2 बार रुकना पड़ा…

कहाँ से शुरू करूं समझ नहीं आता।

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